Thursday, January 15, 2009

किसने किया, मुँह बन्द

मँहगाई गरीबी ज़ुर्म और घोटाला
इन पर नहीं प्रतिबंध होने वाला
क्या अर्थ है समाज का समझ नहीं आता
अपने हाथों से ही अपनी पहचान को मिटा डाला

फिर वर्तमान समस्या का हल निकाल डाला
लोग कहते हैं,सरकार ने विकास की ओर जाते-जाते मंदी की खाई में धकेल डाला
वो तो भला हो मैटो वालो का की जम़ीन खोदकर हमें निकाल डाला
खुदाई चलती रही कार्यशैलियों की रफ़्तार भी थम गई

किसने कारीगरों के हाथों पर तेजाब डाला
मशीनों की रणनिती ने किया इंसानो पर राज
क्या करे विदेश मुद्रा ने हम को खरीद डाला

आज देश है पर्यटक स्थल,
क्योंकि यहाँ है विदेशी पंछियों का बोल-बाला
सोने की चिडिया था जो भारत
आज वो बना रोबॉट मतवाला

जिसकी संवेदनाए मर गई है
चूके अपने हाथों ने ही उसका दिल निकाल डाला
आज भी होते है आदोंलन,
क्योंकि अधिकारों का नहीं कोई रखवाला
दुष्कर्म रोज होते हैं, ज़ुर्म के मुँह पर कौन मारे ताला

राकेश

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